CM सुक्खू ने सभी को साधा, प्रतिभा सिंह भी गदगद; समझें हिमाचल कैबिनेट गठन के सियासी मायने

 हिमाचल प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार में लंबे इंतजार के बाद रविवार को मंत्रिमंडल विस्तार हुआ है। कुल 7 विधायकों को मंत्री बनाया गया है। कांग्रेस हाईकमान ने मंत्रिमंडल के जरिए लोकसभा चुनाव के लिए सियासी जमीन तैयार करने के साथ क्षेत्रीय और जातीय संतुलन को साधने का प्रयास किया है। कैबिनेट गठन में शिमला को ज्यादा तवज्जो दिया गया है। वहीं सुक्खू से नाराज प्रतिभा सिंह को भी मनाने का पुरजोर प्रयास किया गया है। आइए समझते हैं हिमाचल कैबिनेट गठन के सारे पहलुओं को...


हाईकमान ने मजबूत किए सुक्खू के हाथ

सत्ता की कमान सुक्खू को सौंपने के साथ ही पार्टी नेतृत्व ने मंत्री चयन से सीएम को मजबूत किया है। सुक्खू के खासमखास सिपहसालारों को कैबिनेट में जगह मिली है। इनमें शिलाई से हर्षवर्धन चौहान और कसुम्पटी से अनिरुद्ध सिंह शामिल हैं। चुनाव परिणाम के बाद कांग्रेस विधायक दल के नेता के चयन में हर्षवर्धन और अनिरुद्ध दोनों सुक्खू के साथ पूरी ताकत के साथ खड़े रहे। सुक्खू के पसंदीदा इन दोनों विधायकों को पहली बार मंत्रिपद नसीब हुआ है। जुब्बल कोटखाई के विधायक रोहित ठाकुर भी सुक्खू से करीबी होने की वजह से मंत्री पद झटकने में कामयाब रहे। जनजातीय जिला किन्नौर से मंत्री बने जगत सिंह नेगी यूं तो पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह के समर्थक रहे हैं, लेकिन वर्तमान सियासी घटनाक्रम में वह सुक्खू के करीबियों में शुमार हैं।


वरिष्ठ नेताओं को मिली जगह

वरिष्ठता के लिहाज से कर्नल धनीराम शांडिल और चंद्र कुमार का मंत्री बनना पहले से ही तय था। धनीराम शांडिल जहां केंद्रीय हाईकमान के काफी करीब हैं, वहीं चंद्र कुमार सबसे बड़े सियासी जिले कांगड़ा से ओबीसी का प्रमुख चेहरा हैं। इसके साथ ही विक्रमादित्य सिंह को भी मंत्री बनाया गया। हाईकमान द्वारा विक्रमादित्य सिंह को मंत्रिपद देकर सुक्खू और प्रतिभा खेमों में सामंजस्य बिठाया गया है।


सुक्खू मंत्रिमण्डल में 5 राजपूत नेता

मंत्रिमण्डल का चेहरा और आकार सभी धड़ों को संतुलित करने और आगामी लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर किया गया है। राज्य में बड़ी आबादी राजपूतों की है। इसे देखते हुए सुक्खू मंत्रिमण्डल के 7 सदस्यों में 5 राजपूत नेता शामिल किए गए हैं। इसके अलावा आरक्षित वर्गों अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़े वर्ग से एक-एक चेहरा मिला है। राजपूत मंत्रियों में विक्रमादित्य सिंह, अनिरुद्ध सिंह, रोहित ठाकुर, जगत सिंह नेगी और हर्षवर्धन चौहान शामिल हैं। सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू को मिलाकर यह आंकड़ा 6 बनता है। जगत सिंह नेगी राजपूत बिरादरी के साथ जनजातीय जिला किन्नौर का प्रतिनिधित्व करते हैं। धनीराम शांडिल और चंद्र कुमार आरक्षित वर्गों से हैं। इक कैबिनेट में बेशक ब्राह्मण समुदाय का कोई भी नेता शामिल नहीं है, लेकिन ब्राह्मण का बड़ा चेहरा मुकेश अग्निहोत्री राज्य के पहले उप मुख्यमंत्री बने हैं।


युवाओं को साधने का प्रयास 

मंत्रिमंडल विस्तार में वरिष्ठता और अनुभव के साथ युवा जोश को भी तवज्जो दी गई है। 82 साल के धनीराम शांडिल और 78 साल के चन्द्र कुमार के साथ युवा मंत्रियों में 33 वर्षीय विक्रमादित्य सिंह और 45 वर्षीय अनिरुद्ध सिंह शामिल हैं। धनीराम शांडिल और चन्द्र कुमार पिछली कांग्रेस सरकारों में मंत्री रह चुके हैं और उनका अनुभव मंत्रिमण्डल को सशक्त करेगा। छह बार के विधायक हर्षवर्धन चौहान और पांच बार के विधायक जगत सिंह नेगी अनुभवी विधायकों की लिस्ट में हैं।


कैबिनेट विस्तार में छाया शिमला संसदीय क्षेत्र

18 में से 13 सीटें जीतने वाले शिमला संसदीय क्षेत्र को 5 मंत्रियों की सौगात मिली है। इस संसदीय क्षेत्र में आने वाले शिमला जिला से 3, सोलन व सिरमौर जिलों से एक-एक मंत्री बने हैं। मंडी संसदीय क्षेत्र के जनजातीय जिला किन्नौर को मंत्री पद मिला है। कांगड़ा संसदीय क्षेत्र से एक मंत्री बने हैं जबकि हमीरपुर संसदीय क्षेत्र को तरजीह नहीं मिली है। राजनीतिक जानकारों की मानें तो अगले मंत्रिमण्डल विस्तार में कांगड़ा और हमीरपुर संसदीय क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व मिल सकता है। वैसे मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से ताल्लुक रखते हैं।


मंत्रिमण्डल विस्तार में शिमला, सोलन, सिरमौर, कांगड़ा और किन्नौर जिलों को तरजीह मिली है। हालांकि मुख्यमंत्री सुक्खू ने कैबिनेट विस्तार से पहले कांगड़ा जिला व सोलन जिला से दो-दो, कुल्लू जिला और शिमला जिला से एक-एक मुख्य संसदीय सचिव बनाया है। इस तरह से कांग्रेस आलाकमान ने सुक्खू की कैबिनेट में सबको साधने का प्रयास किया है।

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